क्यों ज़रूरी है चुनना – सही करियर विकल्प

मैं पिछले लगभग २५  वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा हू। इस दौरान मुझे बच्चों और उनके पेरेंट्स से बातें करने का अवसर मिलता है. सबकी चिंता यही है की १२ वीं के बाद उन्हें कौन सा करियर ऑप्शन चुनना चाहिए जिससे कोर्स कम्पलीट करने के बाद एक तो उन्हें अच्छी सी नौकरी  मिल जाये ,  दूसरा उनका करियर भी ब्राइट हो । 

जैसा की सभी जानते हैं कि

करियर का चुनाव किसी की भी ज़िन्दगी का टर्निंग पॉइंट हो सकता है.”

सही करियर जहाँ बच्चे की ज़िन्दगी बेहतर बना सकता है वहीँ गलत करियर का चुनाव उनकी ज़िन्दगी मुश्किल बना सकता है।

सही कैरियर कैसे चुनें ? यह बच्चों और  उनके माता-पिता के लिए एक जटिल सवाल है।

मैं आपको कुछ उदहारण देता हूँ जिससे आपको समझने में आसानी होगी की सही करियर  विकल्प सही समय पर न  चुन पाने से बच्चो के जीवन पर इसका क्या असर पड़ता है:

उदाहरण :

कविता वर्मा  पिछले पांच वर्षों से दिल्ली में रहकर गवर्नमेंट जॉब की तैयारी कर रही हैं.  कविता उत्तरप्रदेश    के एक छोटे शहर की रहने वाली हैं जिनके पिता सरकारी विभाग  में क्लर्क हैं. कविता ने साइंस से ग्रेजुएशन किया और  उसके बाद कम्पटीशन की तैयारी शुरू की।  लोगों ने उन्हें सलाह दी कि  दिल्ली में रहकर वह अच्छे से तैयारी  कर पाएंगी इसलिए पांच वर्ष पूर्व वह दिल्ली आ गयीं,  पिछले कई वर्षों से सिविल सर्विसेस की तैयारी कर रही हैं.

उनका और उनके परिवार का सपना है की कविता को  एक अच्छी सरकारी नौकरी मिल जाये।

कविता ने शुरू के दो साल  एक प्रसिद्द कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया, अब दिल्ली में रहकर खुद  ही तैयारी कर रही हैं. कई बार वह इंटरव्यू तक भी पहुंची पर फाइनल सिलेक्शन अभी तक नहीं हो पाया है.

आज वह २५-२६ वर्ष की हो चुकी हैं सफल होने का दबाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है.

दिल्ली के  मुकर्जीनगर में देश के कोने कोने से आये लाखों बच्चे कम्पटीशन की तैयारी कर रहे हैं.  कई अन्य छोटे और बड़े शहरों में  भी लाखों की संख्या में छात्र एवं छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत  कर रहे हैं. कई साल की तैयारी  के बाद कुछ बच्चे  तो सफल हो पाते हैं वहीँ ज्यादातर बच्चे अपने जीवन के कई वर्ष तैयारी में लगाने के बाद भी सफल नहीं हो पाते  और उसके बाद उनके  पास  घर वापस लौटने के अलावा कोई दूसरा  रास्ता नहीं  बचता है.

उदाहरण   :

सौरभ मध्यप्रदेश के एक छोटे शहर से हैं, पढाई में औसत थे फिर भी  परिवार के लोग उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे। जब  दो वर्ष  की कड़ी मेहनत के बाद भी  आई आई टी और एन आई टी में सिलेक्ट नहीं हो सके तो  नॉएडा के  एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन दिलवा दिया गया. जैसे तैसे बीटेक भी  कर लिया, इस दौरान १० से १२ लाख रुपये खर्च हो गए। कॉलेज में कोई बड़ी कंपनी कैंपस प्लेसमेंट के लिए नहीं आई जो आई भी वो मात्र  १ -१. ५ लाख का सालाना पैकेज दे रही थी.

कोई और रास्ता न देख सौरभ वापस भोपाल आ गया. उसने अपने अन्य दोस्तों की तरह ही भोपाल में रहकर बैंक की तैयारी शुरू कर दी है. ४-५ वर्ष की तैयारी के बाद भी सफलता अभी  दूर ही है.

लगता है इंजीनियर बनने का सपना तो सपना ही रह जायेगा , अब चिंता यह है कि नौकरी भी मिल पायेगी या नहीं.

 सौरभ अन्य बच्चों की तरह अभी भी जी तोड़ मेहनत कर रहा है क्योंकि नौकरी करने के अलावा उसके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है.  

करोड़ों बच्चे  ग्रेजुएशन और पोस्ट  ग्रेजुएशन करके कई  वर्षों से बैंक/ रेलवे / एस. एस.सी. /सिविल सर्विसेस आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की  तैयारी कर रहे हैं.

आपको भी ऐसे कई उदहारण मिलेंगे। अब तो यह ज्यादातर मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी है.

देश के हर शहर में लाखों करोड़ों बच्चे  प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं इस उम्मीद में की एक दिन उन्हें एक छोटी ही सही पर नौकरी मिल जाएगी. उनके साथ उनके माता पिता और पूरा परिवार कष्ट सहता है, त्याग करता है . पर नौकरी तो लाखों करोड़ों में से कुछ सैकड़ों को ही मिल पाती है बाकी लाखों करोड़ों  बच्चे अपनी जवानी  के कीमती साल तैयारी में  ही खपा देते हैं.

उदाहरण : आरिफ ने ग्रेजुएशन के बाद अपने पेरेंट्स और रिश्तेदारों की सलाह पर अपने शहर के ही कॉलेज से एम बी ए किया. आरिफ पढाई में औसत से ठीक था।  आई. आई. एम. जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होना उसके बस का नहीं था इसका ज्ञान उसे था और न ही उसके परिवार के पास इतने पैसे थे की वह दिल्ली , मुंबई जैसे बड़े शहरों के किसी अच्छे कॉलेज से एम. बी. ए. कर सके अतः उसने शहर का  ही कॉलेज चुना.

२ वर्ष में एम. बी. ए. करने के पश्चात् अपने प्रयासों से ही एक लोकल संस्थान में जॉब मिल गया है। सैलरी कामचलाऊ है करियर ग्रोथ के चांस भी काफी कम हैं.

ऊपर दिए तीनों उदाहरण यह बताते हैं की पढ़ाई लिखाई में औसत बच्चे , जो करोड़ों में हैं, के लिए जॉब मिलने के अवसर बहुत ही कम हैं.

सरकारी नौकरियां जहाँ कम  से कम  होती जा रहीं हैं  वहीँ प्राइवेट संस्थानों में भी प्रतियोगिता बढ़ती  जा रही है. उस पर भी अगर सही करियर विकल्प नहीं चुना तो मुश्किलें और बढ़ जाती हैं. 

नौकरी न मिलने की एक वजह इतनी संख्या में  नौकरियां न होना तो  है ही परन्तु सही करियर ऑप्शन का न चुन पाना भी एक बड़ा कारण  है. इस  ब्लॉग  को लिखने का एक बड़ा और मुख्य उद्देश्य इसके  माध्यम से  लाखों करोड़ों बच्चों को सही करियर विकल्प चुनने में उनकी मदद करना है.

यह ब्लॉग  देश में करोड़ों बच्चों का  करियर बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा । 

यह ब्लॉग :

आपको सही करियर ऑप्शंस के बारे में बताएगा

सफल बच्चों के साक्षात्कार  के द्वारा उनकी सफलता की कहानियां आप तक पहुंचाएगा

आपको विभिन्न सेक्टर्स में जॉब ओपनिंग्स के बारे में  लगातार अपडेट करता रहेगा

  आपको  इंडस्ट्री की  प्रसिद्द हस्तियों से उनके  इंटरव्यू / साक्षात्कार के माध्यम से रूबरू करवाएगा

–   आपको व्यक्तित्व विकास ( पर्सनालिटी डेवलपमेंट ) और इंटरव्यू में सफल होने की टिप्स भी देगा

इसके साथ साथ और भी बहुत कुछ होगा।

जल्द ही आप मुझे यूट्यूब पर भी देख पाएंगे.

 इन सभी जानकारियों के लिए आप प्रत्येक पोस्ट पढ़ते रहें, मुझे पूरा विश्वास है की आपको मनचाहा करियर ऑप्शंस  ज़रूर मिलेगा जो आपकी लाइफ का टर्निंग पॉइंट बन सकता है।

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धन्यवाद्

अरुण त्रिपाठी

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4 thoughts on “क्यों ज़रूरी है चुनना – सही करियर विकल्प”

  1. It has been a story of all the middle class family…most of the kids are being dragged by the parents to choose the carrier forcibly without actually knowing the child’s interest,which leads them to now where….!!

    1. Thanks Pawan for your kind words.
      hope you have subscribed the blog to get new posts on various career options which will help students and their parents in choosing right career options
      kindly share the post so that more people get benefited

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