About

 

Don’tworrypapa.com –  में आपका स्वागत है.

 

About me:

देश  के ह्रदय मध्य प्रदेश में मेरा जन्म हुआ.  शिक्षा दीक्षा मध्य प्रदेश में ही हुई. साइंस में  ग्रेजुएशन और अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के पश्चात मैंने बीएड ( बैचलर इन एजुकेशन) किया. मैंने अपने करियर के शुरुआती लगभग १५ वर्ष मध्य प्रदेश में ही गुजारे। मध्य प्रदेश मेरी जन्म भूमि के साथ मेरी कर्म स्थली भी है.

वैसे मूल रूप से हम लोग इलाहबाद ( प्रयागराज) के रहने वाले हैं और बचपन से लेकर अभी तक मैं वहां से भी लगातार  जुड़ा  रहा हूँ. इस तरह मेरे जीवन पर  मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों संस्कृतियों का  प्रभाव रहा है. १० वर्ष पहले मैं दिल्ली आ गया और तब से  दिल्ली का निवासी हूँ.

पिछले २५ वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र ( एजुकेशन सेक्टर)  में कार्य कर रहा हूँ.

 

Education & Career:

 

हर मध्यमवर्गीय परिवार की ही तरह मेरा और  परिवार के बड़े बुजुर्गों का  सपना  था की पढ़ाई पूरी करने के पश्चात कहीं अच्छी सी जॉब लग जाये , जॉब अगर सरकारी हो तो कहने ही क्या. उस समय  भी इंजीनियरिंग  और मेडिकल का ही ज़ोर था, हर पैरेंट अपने बच्चों को इंजीनियर या डॉक्टर बनाना चाहता था. मेरे पिता मुझे इंजीनियर बनाना चाहते थे.  इसके लिए मैथ्स पढ़ना ज़रूरी था  मुझे  भी मैथ्स दिला दी गयी.  ज्यादातर बच्चों की ही तरह मुझे भी मैथ्स से बहुत डर लगता था पर अब तो  मैथ्स ही पढ़ना थी. इंजीनियरिंग टेस्ट  बहुत टफ हुआ करता था , क्लियर नहीं कर  पाया।  बीएससी करनी पड़ी और  इस तरह  मैंने साइंस में ग्रेजुएशन कर लिया।

 

प्रश्न था अब क्या करें ? क्योंकि उस वक्त तक सिर्फ और सिर्फ सरकारी नौकरी का ही सहारा था,  प्राइवेट सेक्टर आज की तरह न थे. बीएससी करने के बाद टीचर  बनने के चक्कर में लोग एमएससी किया करते थे इस वजह से वहां भी काफी कम्पटीशन था।   कुछ लोगों ने सिविल सर्विसेज , बैंक और रेलवे क्लर्क आदि प्रतियोगी परीक्षाओं  की तैयारी करने का सुझाव दिया. उसकी तैयारी भी शुरू की,  कुछ छुटपुट सफलताएं भी मिलीं पर फाइनल सिलेक्शन नहीं  हो पाया,  लेकिन इतना समझ आ गया की यहां बहुत ही टफ कम्पटीशन है और उसके बाद भी कोई गारंटी नहीं है की नौकरी मिल ही जाये. कई लोगों को देखा जो ५-१०  वर्षों से तैयारी में लगे थे लेकिन सफलता उनसे अभी भी कोसों दूर थी. मैं अपना जीवन इस तरह दांव पर नहीं लगा  सकता था.

 

लेकिन करें तो करें क्या,   कुछ समझ नहीं आ रहा था , पूरी तरह confusion की स्थिति थी.

 

लोगों की सलाह पर  पोस्ट ग्रेजुएशन और बीएड  कर लिया इसी के साथ साथ  प्रतियोगिता परीक्षाओं की  तैयारी भी करता रहा.

ज़िन्दगी के बहुमूल्य वर्ष  इसी confusion में बीत गए.

 

Why to write this Blog?

 

आज  भी करोड़ों युवा और उनके पेरेंट्स इस परेशानी का सामना कर रहे हैं.

बच्चा २ से ३ वर्ष की उम्र से ही स्कूल जाना शुरू कर देता है , ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करते करते वह  २४ -२५ वर्ष हो जाता  है यानि ज़िन्दगी के २० -२२  बहुमूल्य साल वह पढाई में खर्च कर देता है और इस पढाई में लाखों रुपये  भी खर्च होते हैं. परिवार के सभी सदस्य अपने अपने हिस्से का त्याग करते हैं.

ये सब किसलिए किया जाता है की पढाई पूरी करने के बाद एक अच्छी सी नौकरी मिल जाएगी.

 

लेकिन नौकरी  तो हज़ारों में किसी एक को मिलती है.

बहुत सारे  लोगों को नौकरियां मिल सकती हैं अगर वे सही करियर ऑप्शन का चुनाव कर सकें.

इस ब्लॉग के माध्यम से मैं बच्चों को उनका करियर चुनने में मदद करूँगा.

सही  करियर ऑप्शन्स चुनने से इस समस्या को काफी हद तक हल किया जा सकता है और काफी लोगों को जॉब मिल सकता है.

क्योंकि

” सही करियर का चुनाव आपकी ज़िन्दगी बना सकता है.” तो   ” गलत करियर का चुनाव आपकी ज़िन्दगी बर्बाद भी कर सकता है.”

 

इस ब्लॉग का उद्देश्य  बच्चों और पेरेंट्स  को सही  करियर ऑप्शन्स के बारे बताना है जिससे उन्हें जॉब मिलने में आसानी हो,  उनका करियर भी आगे बढे और उनका भविष्य भी उज्जवल हो.

 

यह ब्लॉग करोड़ों बच्चों को  सही करियर ऑप्शन्स चुनने में मदद करेगा.

साथ ही  टीचर्स और  पेरेंट्स को भी जागरूक करेगा जिससे वे  अपने छात्रों और बच्चों का करियर मार्गदर्शन कर सकें.

 

 “ Don’t Worry Papa”  

 

मैंने अपने पिता को मेरे और छोटे भाई के करियर की चिंता करते देखा है. उन्होंने वह सब किया जो वह कर सकते थे।  बल्कि हमारी पढाई के लिए  अपनी हैसियत से ज्यादा ही किया . बच्चों के करियर के लिए पिता अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है.

बच्चों के  करियर और उज्जवल भविष्य के लिए एक  पिता से ज्यादा  चिंता भला कौन करता है. यह ब्लॉग उनकी इसी चिंता को कम करेगा।

आप सभी के उज्जवल भविष्य की शुभकामनाओं के साथ

आपका

अरुण त्रिपाठी